गणगौर की कहानी।

गणगौर मुख्यतः राजस्थान में मनाया जाने वाला त्यौहार है जो चैत्र माह की तीज को आता है। गणगौर का पूजन होली के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से लेकर चैत्र शुक्ल तेज तक होता है। गणगौर के पूजन में लड़कियां और नवविवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और ससुराल या पीहर की खुशी की कामना करती हैं। पूजन के साथ गणगौर की कथा (gangaur ki katha) सुनी जाती है। गणगौर की कथा सुनने वाले पर ईसर गणगौर की कृपा बनी रहती है।

गणगौर की कहानी।

गणगौर की कहानी – एक बार राजा ने जौ और चने बोये,और माली ने अपने घर मे दूब बोयी । राजा के जौ चने बढ़ते गए और माली की दूब घटती गई । एक दिन माली ने सोचा कि क्या बात है ? राजा के जौ चने तो बढ़ते जा रहे हैं और मेरी दूब क्यों घटती जा रही है । एक दिन माली छुपकर बैठ गया और देखने लगा कि क्या कारण है ? तब माली ने देखा कि कुंवारी लड़कियां आई और दूब तोड़कर ले गई तब माली उनके कपड़े छीनने लगा । और पूछने लगा कि तुम दूब क्यों ले जा रही हो ?

 

लड़कियां बोली हम सोलह दिन गणगौर पूजते हैं इसलिए पूजा के लिए दूब ले जा रहे हैं। सो हमारे कपड़े दे दो । सौलह दिन बाद गणगौर विदा होगी जिस दिन हम तुम्हें लापसी ,हलवा , घेवर , मिठाई आदि लाकर देंगे । फिर उसने सबके कपड़े वापस दे दिए । जब सौलह दिन पूरे हुए तब लड़कियों ने लापसी , हलवा आदि सामग्री मालन को लाकर दी । बाहर से मालन का बेटा आया और बोला माँ मुझे बहुत भूख लगी है । मालन बोली कि बेटा आज तो लड़कियां बहुत सारा खाना देकर गयी है । रसोई में रखा है । बेटे से रसोई खुली नहीं , तब माँ ने आकर चिन्टी अंगूली से छींटा दिया तो रसोई खुल गई । अंदर देखा तो ईसर गणगौर बैठे थे। ईसरजी ने बहुत सुंदर वस्त्र पहने हुए थे और गोरा माता मांग सवार रही थी। रसोई में अन्न धन के भंडार भरे पड़े थे। माली, मालन और उनके बेटे को ईसर गणगौर जी के सुंदर दर्शन हुए। है गणगौर माता जिस प्रकार माली के परिवार को दर्शन दिया उसी प्रकार सबको दर्शन देना। ईसरजी जैसा भाग और गोरा जैसा सुहाग सबको देना। गणगौर की कहानी कहतां न सुनतां न और सारे परिवार को देना।